सहज-योग
सिद्धों का एक महान संदेश, ‘जागो’, ओशो की वाणी द्वारा इन प्रवचनों में और भी अधिक मुखरित हुआ है। ओशो कहते हैं : ‘‘जागो, मन जागरण की बेला! और जागरण की बेला हमेशा है। ऐसा कोई क्षण नहीं जब तुम जाग न सको। ऐसा कोई पल नहीं जब तुम पलक न खोल सको। आंख बंद किए हो यह तुम्हारा निर्णय है। आंख खोलना चाहो तो इसी क्षण क्रांति घट सकती है।’’
विषय सूची
प्रवचन 1 : जागो मन, जागरण की बेला
प्रवचन 2 : ओंकार : मूल और गंतव्य
प्रवचन 3 : देह गेह ईश्वर का
प्रवचन 4 : सहज-योग और क्षण-बोध
प्रवचन 5 : जगत—एक रूपक
प्रवचन 6 : सहज-योग का आधार : साक्षी
प्रवचन 7 : जीवन के मूल प्रश्न
प्रवचन 8 : जीवन का शीर्षक : प्रेम
प्रवचन 9 : फागुन पाहुन बन आया घर
प्रवचन 10 : तरी खोल गाता चल माझी
प्रवचन 11 : खोलो गृह के द्वार
प्रवचन 12 : प्रेम : कितना मधुर, कितना मदिर
प्रवचन 13 : प्रार्थना अर्थात संवेदना
प्रवचन 14 : धरती बरसे अंबर भीजे
प्रवचन 15 : प्रेम—समर्पण—स्वतंत्रता
प्रवचन 16 : भोग में योग, योग में भोग
प्रवचन 17 : भाई, आज बजी शहनाई
प्रवचन 18 : हो गया हृदय का मौन मुखर
प्रवचन 19 : प्रेम प्रार्थना है
प्रवचन 20 : हे कमल, पंक से उठो, उठो
* this is a hardcover book and comes in a sealed wrap.
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